यकींन मानिये हम अपनी मानवता खो चुके है ।

यह मेरा पहला लेख है और यकींन मानिये कि इससे पहले मै कभी अपने लेख को लेकर सामने नहीं आया हूँ। मेरा नाम, मै इस लेख के अंतिम मे शायद लिखता, लेकिन इस बात को कोई भरोसा नहीं कि कुछ चुनिंदा लोग मुझे मेरे नाम से मेरे धर्म और मेरी विवेचना करने लगेंगे। मुझे उन लोगो से कोई समस्या नहीं है, बल्कि ये लेख उन लोगो के लिए है जिन्होंने सब देखकर भी अपनी आँखे बंद कर रखी है ।

यकींन मानिये हम अपनी मानवता खो चुके है  । humanity
यकींन मानिये हम अपनी मानवता खो चुके है  ।


हम आज 21वी शताब्दी में जी रहे है, कहने को हमारे पास हमारे पास वो सब है जो जीने के लिए आवश्यक है। हमने अपने आप को इतना विकसित कर लिया है कि हमारे लिए अब कुछ भी नामुमकिन नहीं। धरती पर रहकर हम आकाश के सपने देखते है। न केवल देखते है, बल्कि बहुत हद तक पूरा भी कर चुके है। पर विडंबना तो ये है हमने अपनी नजरे इतनी ऊंची  कर ली है कि हम हमारे आस पास देखना भूल गए है। हम विज्ञान को हासिल करते-करते मौलिक ज्ञान भूल चुके है, धन को हासिल करते-करते अपनों को भूल चुके है, धर्म को हासिल करते-करते मानवता को भूल चुके है। कहने को हम बहुत विकसित है, किन्तु हम स्वयं को बेच चुके है। मैं किसी बात को उदहारण नहीं दूंगा, क्युकी यहाँ यदि मैंने उदहारण दिया तो ये या तो धार्मिक टिप्पणी, या राजनीत्तिक टिप्पणी बन जायेगा । आप स्वयं अपने अंदर झाकिये और देखिये कि आपके अंदर मानवता के कोई भी गुण शेष है। 

यकींन मानिये हम अपनी मानवता खो चुके है  Humanity
यकींन मानिये हम अपनी मानवता खो चुके है 

हम मे मानवता नहीं रही, हम केवल ढोंग करते है मानव होने का । हमारी मदद मे हमारी साफ नियत नहीं, अपना लाभ छिपा होता है। हम ईश्वर को पाने के लिए धर्म नहीं पूजते, धर्म को अपनी गलतियों को छुपाने का ढाल बनाते है। केवल एक बार अपने अंदर झाकिये और देखिये कि कभी भी किसी की सच्चे मन से मदद की है, किसी के आँसू पोछे है, किसी को हसाया है, किसी को रोने के लिए अपना कंधा दिया है। यदि दिया है तो आपमें इंसानियत अभी शेष है और यदि नहीं तो आप चाँद को अपनी मुट्ठी मे क्यों न करले, तो आप एक मामूली से मानवतहिंन मानव है। 

हमे उतनी आवश्यकता नहीं है विज्ञानं की, जितनी आवश्यकता आज मानवता की है । क्युकी हमे मुसीबत मे न कोई ईश्वर बचाने आयेगा, न कोई विज्ञानं और न कोई धर्म, क्युकी ये सभी तभी हमे बचा पाएंगे जब ये किसी सच्चे इंसान के हाथ मे होंगे।

यदि किसी को बुरा लगे तो क्षमा चाहूंगा, क्युकी अब आंखे मूंदना मुश्किल हो रहा है।     

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5 comments :

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